शाहीन बाग में जलभराव पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार और MCD को दिए मरम्मत के आदेश
नई दिल्ली|दिल्ली हाईकोर्ट ने शाहीन बाग-ओखला इलाके में सड़क पर हो रहे गंभीर जलभराव और सीवर के उल्टे बहाव पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह देखकर बहुत दुख हो रहा है कि कोई भी सिविक एजेंसी इस सड़क की देखभाल की जिम्मेदारी नहीं ले रही है।
जिम्मेदारी तय करने में हड़कंप
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनीत पीएस अरोड़ा की विशेष बेंच ने पिछले हफ्ते इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने पाया कि अबुल फजल ड्रेन और उसके पास की सड़क उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग की है। दिल्ली जल बोर्ड, डीडीए और MCD ने दौरा करने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं किया कि सड़क की मेंटेनेंस किसकी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया और यूपी के रेजिडेंट कमिश्नर से भी अपना पक्ष मांग लिया।
कोर्ट के सख्त निर्देश
कोर्ट ने आदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग एमसीडी और जल बोर्ड के साथ मिलकर सड़क की सफाई, मरम्मत और दोबारा निर्माण का काम करेगा। एमसीडी और जल बोर्ड तुरंत अस्थायी उपाय करें ताकि सीवर का पानी वापस न बह सके। इससे यातायात और पैदल चलने वालों को परेशानी न हो। जब तक जिम्मेदारी पूरी तरह स्पष्ट न हो, यूपी सिंचाई विभाग ही इसकी मुख्य जिम्मेदारी लेगा।
कैसे शुरू हुआ मामला?
दरअसल, टीओआई ने एक रिपोर्ट में दिखाया गया था कि शाहीन बाग-ओखला की एक प्रमुख सड़क पर खुला सीवर बह रहा है। इससे ई-रिक्शा और बाइक ड्रेन में गिर रही हैं, लोग घायल हो रहे हैं और स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो गया है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया और दिल्ली जल बोर्ड को तुरंत लीकेज रोकने तथा इलाके में बेसिक सफाई बहाल करने का निर्देश दिया था।
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जल बोर्ड ने यूपी पर डाली जिम्मेदारी
दिल्ली जल बोर्ड ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा कि उसने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत ओखला वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीटेड पानी ड्रेन में डालने का काम पूरा कर दिया। लेकिन यूपी सिंचाई विभाग ने ड्रेन की नियमित खुदाई, चौड़ीकरण और मरम्मत नहीं की। नतीजा यह हुआ कि पानी सड़क पर भर गया और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई। जल बोर्ड का कहना है कि ड्रेन उसकी क्षेत्राधिकार से बाहर है, फिर भी उसे गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।


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