महाशिवरात्रि पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन एवं संगम भवन सहित शहर के सभी केन्द्रो पर शिव ध्वजारोहण तथा विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित
महाशिवरात्रि पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन एवं संगम भवन सहित शहर के सभी केन्द्रो पर शिव ध्वजारोहण तथा विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित
आत्मशांति, संयम और सकारात्मक जीवन जीने की दिशा का सन्देश मिलता है महाशिवरात्रि से - पुलिस उपमहानिरीक्षक राकेश सगर
सच्चे भाव से प्रसन्न होते है भोलेनाथ - बीके आदर्श दीदी
ग्वालियर। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय के माधवगंज स्थित प्रभु उपहार भवन एवं पुराना हाईकोर्ट लाइन स्थित संगम भवन केंद्र पर विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दोनों ही केन्द्रो सहित ग्वालियर के सभी केंद्रों पर विधिवत शिव ध्वजारोहण भी संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसएएफ द्वितीय वाहिनी के कमानडेंट एवं पुलिस उप महानिरीक्षक श्री राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी, यज्ञाचार्य पं. डॉ. विकाश त्रिपाठी, प्रतीक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर, मनोज चौरसिया, बीके डॉ. गुरचरण सिंह, बीके प्रहलाद भाई उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ शिव ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसके पश्चात केंद्र से जुड़े बाल कलाकारों द्वारा भक्तिमय एवं प्रेरणादायक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। कार्यक्रम के शुभारम्भ में बीके डॉ गुरचरण सिंह ने कहा कि महाशिवरात्रि धार्मिक पर्व के साथ साथ आत्म चिंतन एवं आत्मजागरण का पावन पर्व है। ‘शिव’ का अर्थ कल्याणकारी और ‘रात्रि’ का अर्थ अज्ञान का अंधकार है। अर्थात यह वह रात्रि है जिसमें अज्ञान का अंधकार समाप्त होकर ज्ञान का प्रकाश फैलता है। यह पर्व मनुष्य को स्वयं के भीतर झांकने और आत्म-परिवर्तन की प्रेरणा देता है।

मुख्य अतिथि राकेश सगर ने कहा कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में मनुष्य तनाव, क्रोध और अशांति से घिरा रहता है। ऐसे समय में महाशिवरात्रि का संदेश आत्मशांति, संयम और सकारात्मक जीवन जीने की दिशा प्रदान करता है। बीके आदर्श दीदी ने कहा कि शिव-पूजन का वास्तविक अर्थ जल-फूल अर्पित करनें के साथ साथ अपने भीतर की बुराइयों - अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, लोभ एवं नकारात्मक प्रवृत्तियों को छोड़ने का भी संकल्प लेना चाहिए। जब साधक अपनी कमजोरियों को स्वीकार कर उन्हें छोड़ने का संकल्प करता है, तभी जीवन में वास्तविक परिवर्तन आरंभ होता है। शिव को भोलेनाथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे दिखावे से नहीं, बल्कि सच्चे भाव से प्रसन्न होते हैं। पंडित डॉ. विकाश त्रिपाठी ने कहा कि महाशिवरात्रि ऐसा पर्व है जो हमें भीतर के अंधकार को पहचानकर उसे रूपांतरित करने का अवसर देता है। शिव वह परम चेतना हैं, जिनसे जुड़कर मनुष्य आत्मबल प्राप्त करता है। कार्यक्रम में मनोज चौरसिया नें अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि परमात्मा का आशीर्वाद उन्हें ही मिलता है जों अपने कार्य को पूर्ण ईमानदारी और लगन के साथ करते हैं।
बीके प्रहलाद भाई ने कहा कि आज का मनुष्य बाहरी संसार में बहुत व्यस्त है, लेकिन भीतर से खाली और अशांत होता जा रहा है। महाशिवरात्रि का वास्तविक संदेश है कि हम अपने मन को स्थिर करें, परमात्मा शिव से जुड़कर अपनी चेतना को जागृत करें। जब आत्मा परमात्मा से जुड़ती है, तब जीवन में शांति, शक्ति और पवित्रता का अनुभव स्वतः होने लगता है। आइए, हम सभी इस पावन पर्व पर संकल्प लें कि अपने विचारों को सकारात्मक बनाएंगे, व्यसनों एवं विकारों से मुक्त होकर जीवन को श्रेष्ठ दिशा देंगे।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर वक्ताओं नें सभी को अपनी शुभकामनायें दीं
कार्यक्रम में बीके ज्योति दीदी, बीके रोशनी, बीके सुरभि, बीके पवन, बीके जीतू सहित सकड़ों लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम का समापन ईश्वरीय प्रसाद वितरण एवं शांति संदेश के साथ हुआ।


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