Delhi में ‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने पर मंथन
दिल्ली| मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने हाईकोर्ट को बताया है कि सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के हिंदी साइनेज को सर्वोच्च न्यायालय में बदलना आसान नहीं है। इसमें करीब 40 से 45 लाख रुपये का खर्च आएगा। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की बेंच के सामने डीएमआरसी के वकील ने कहा कि केवल स्टेशन पर लगे बोर्ड ही नहीं, बल्कि रूट मैप, मोबाइल ऐप और अन्य सूचनात्मक सामग्री में भी बदलाव करना पड़ेगा। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।वकील ने यह भी कहा कि अगर एक स्टेशन का नाम बदला जाता है, तो अन्य स्टेशनों के लिए भी इसी तरह की मांगें उठ सकती हैं। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी। अदालत ने कहा कि भविष्य में और याचिकाएं आने की संभावना इस मामले का विरोध करने का आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने डीएमआरसी को इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह सुनवाई उमेश शर्मा की जनहित याचिका पर हो रही है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट स्टेशन का हिंदी नाम देवनागरी में सर्वोच्च न्यायालय होना चाहिए। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अन्य स्टेशनों सेंट्रल सेक्रेटेरिएट का हिंदी नाम केंद्रीय सचिवालय लिखा गया है। उन्होंने आधिकारिक भाषा कानून का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के दफ्तरों में साइनेज और नेम प्लेट अंग्रेजी और हिंदी, दोनों में होने चाहिए और हिंदी देवनागरी लिपि में होनी चाहिए।


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