पीतांबरा इस्टेट एफ-ब्लॉक (इंद्रमणि नगर) में बड़ा जमीन घोटाला: नगर पालिक निगम अधिनियम की उड़ीं धज्जियां

ग्वालियर। शहर के वार्ड 21 (क्षेत्रीय कार्यालय 10) के तहत आने वाली पीतांबरा इस्टेट एफ-ब्लॉक (इंद्रमणि नगर) में इन दिनों एक ऐसा खेल चल रहा है जिसने ग्वालियर के नगर नियोजन (Town Planning) के दावों की पोल खोल दी है। एक रसूखदार बिल्डर और राजनेता के संरक्षण में कॉलोनी के आरक्षित 'पार्क' को भूखंड बनाकर बेच दिया गया है। कानून की सरेआम अवहेलना: इन धाराओं का हुआ उल्लंघन नगर निगम के नगर निवेशक महेंद्र अग्रवाल और भवन अधिकारी यशवंत मैकले की चुप्पी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर इन कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है: मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 291/292: किसी भी कॉलोनी के स्वीकृत ले-आउट (Layout) में बदलाव करना या सार्वजनिक उपयोग (पार्क/सड़क) की जमीन को निजी स्वार्थ के लिए बेचना एक दंडनीय अपराध है। मध्य प्रदेश नगर पालिका (कॉलोनाइजर का पंजीकरण, निर्बंधन तथा शर्तें) नियम, 1998: इस नियम के तहत बिल्डर को कुल भूमि का एक निश्चित हिस्सा सार्वजनिक पार्क और सुविधाओं के लिए छोड़ना अनिवार्य है। इसे बेचना 'धोखाधड़ी' की श्रेणी में आता है। IPC की धारा 420 एवं 467/468: रजिस्ट्री में प्लॉट नंबर कुछ और दिखाना और कब्जा पार्क की जमीन पर देना स्पष्ट रूप से 'कूटरचना' और 'जालसाजी' है।

अधिकारियों की 'मौन स्वीकृति' या 'पौ बारह'?

हैरानी की बात यह है कि जहाँ आम आदमी को एक कमरा बनाने पर निगम का अमला नोटिस थमा देता है, वहीं पीतांबरा इस्टेट में अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है। क्षेत्रीय कार्यालय 10 के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से आंखें मूंद कर बैठे हैं। क्या यह माना जाए कि राजनेता और नगर सेठ के प्रभाव में आकर अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों की तिलांजलि दे दी है?

जनता की मांग: निष्पक्ष जांच और ध्वस्तीकरण

कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि पार्क की जमीन पर हो रहे इस अवैध अतिक्रमण को तुरंत रोका जाए। यदि नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन इस पर संज्ञान नहीं लेते हैं, तो यह मामला उच्च न्यायालय (High Court) तक जा सकता है, जहाँ अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय होगी।

> कठघरे में प्रशासन:
> * क्या निगम आयुक्त इस 'जमीन घोटाले' की जांच के लिए कोई विशेष टीम गठित करेंगे?
> * पार्क की जमीन पर हुई रजिस्ट्रियों को शून्य (Void) घोषित करने की प्रक्रिया कब शुरू होगी?
> * भ्रष्ट अधिकारियों पर विभागीय जांच कब बैठेगी?