परिवहन विभाग की आड़ में साजिश? कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों पर उठे सवाल
ग्वालियर। तथाकथित अपराधी भ्रष्टाचार मिटाने की आड़ में प्रदेश में किस स्वार्थपूर्ति के लिए कानून व्यवस्था को चुनौती देकर अशान्ती फैला रहें है? मामला परिवहन विभाग की आड़ में प्रदेश सरकार को बदनाम करने का षड्यंत्र।
प्रथम किस्त
विगत 2 महीने से निरंतर संदिग्ध परिस्थितियों में प्रदेश के कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर लोग मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में फैले भ्रष्टाचार को मिटाने का संकल्प लेकर प्रदेश के चेक पॉइंट पर अपने साथियों के साथ पहुंचकर जिस प्रकार अपनी गतिविधियों को जारी रख सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश के भारी वाहन चालकों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध भड़काकर प्रदेश परिवहन विभाग में आतंक और भय का माहौल बनाने के साथ कानून व्यवस्था को भी चुनौती दी जा रही है अगर यह गतिविधियां मध्य प्रदेश सरकार मौन रहकर देखता रहा तो प्रदेश में कभी भी अशांति का वातावरण पैदा होने के साथ सरकार के लिए खतरा बन सकती है। हम मानते हैं मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में चेक पॉइंट पर भ्रष्टाचार होता है परंतु कभी किसी ने सोचा यह क्यों होता है क्यों वाहन मालिक तथा वाहन चालक मोटर व्हीकल एक्ट से बचने के लिए पैसा देते हैं हकीकत तो यह है भारतीय मोटर व्हीकल एक्ट तथा प्रदेश के राज्य मोटर व्हीकल एक्ट का देश में जिस प्रकार बेखौफ़ उल्लंघन हो रहा है जिससे मध्य प्रदेश में दुर्घटनाओं का आंकड़ा, मौतो की संख्या, सड़कों की दुर्दशा को सुधारने के लिए देश के विभिन्न राज्यों को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए विभिन्न प्रदेशों के परिवहन विभाग तथा यातायात पुलिस विभाग शासन तथा जनहित में सक्रिय है जब इन नियमों का कठोरता से पालन करने के लिए देश प्रदेश की सड़कों पर इन कर्मचारियों अधिकारियों को उतारा जाता है तभी उन पर भ्रष्टाचार की आरोप शुरू हो जाते हैं यह सिलसिला आज से नहीं अनवरत चलता आ रहा है आज सोशल मीडिया होने के कारण वाहन चालक तथा वाहन मालिक अपनी स्वयं की गलतियों को छुपाते हुए दुष्प्रचार करते हैं इसी कड़ी में राजनीतिक प्रवृत्ति अथवा आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी शामिल होकर वाहन चालक तथा वाहन मालिकों की भावनाओं को भड़काते हुए षड्यन्त्र के तहत अपने स्वार्थ के लिए परदे के पीछे सक्रिय हो जाते हैं। बताया जाता है कि अब चेक पॉइंट पर भी इ चालान शुरू होने से भ्रष्टाचार पर काफी हद तक अंकुश लगा है परंतु ई चालान न भरने के लिए परिवहन विभाग तथा सरकार को बदनाम करने का एक राजनीतिक षड्यंत्र है अगर आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश की सड़कों के रास्ते गुजरने वाले इन 60 % भारी वाहनों पर 1 से 6 तक ई-चालान भरने की राशि लंबित है कई वाहनों पर तो दुहाई का आंकड़ा भी पार कर चुका है पर बेखौफ़ यह सब गतिविधियां वाहन माफिया संचालित कर रहा है। एक अन्य जानकारी के अनुसार भारी वाहन चलने वाले 80 % चालकों के पास कामर्शियल हैवी लाइसेंस नहीं होता वर्दी और सीट बेल्ट के नियम तो आप भूल जाओ कि यह वाहन चालक इनका पालन करते हैं ऐसी कई छोटी बड़ी मोटर व्हीकल एक्ट की धाराएं हैं जिनको पालन करना तो अनिवार्य है परंतु परिवहन माफिया इन नियमों की धजिया उडाता है ऐसी स्थिति वाहन चालक ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से समझौता राशि देकर मुक्त हो जाते हैं परंतु परिवहन माफिया इससे भी संतुष्ट न होते हुए कानून तथा व्यवस्था को ऐसे आपराधिका प्रवृत्ति व तथाकथित नेताओं का सहारा लेकर अपने अपराध को छुपाते हुए विभाग तथा सरकार को बदनाम कर प्रदेश की कानून व्यवस्था को ऐसी गतिविधियों के माध्यम से चुनौती दे रहे हैं आखिर कब तक मोटर व्हीकल ऐक्ट पालन करने वाले अधिकारी कर्मचारी भय और आतंक के माहौल में काम करेंगे ऐसी ही गतिविधियों से निपटने के लिए राजस्थान सरकार ने तो सभी जिला स्तर पर पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों को ऐसी गतिविधियों को संचालित करने के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं परंतु मध्य प्रदेश सरकार ऐसी गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश की कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए सरकार को बदनाम करने वाले षडयंत्रकारियों के विरुद्ध कब कठोर कार्रवाई करेगी?


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