इंडो-पैसिफिक में 20 दिन चला सी ड्रैगन अभ्यास, भारत-अमेरिका समेत 5 देशों ने किया प्रदर्शन
नई दिल्ली। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को पुख्ता करने और पनडुब्बी रोधी युद्ध कौशल को धार देने के उद्देश्य से भारत और अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर 20 दिनों तक चलने वाला एक्सरसाइज सी ड्रैगन 2026 सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। गुआम स्थित एंडरसन वायु सेना बेस पर 28 मार्च को समाप्त हुए इस बहुपक्षीय अभ्यास में भारत और अमेरिका के अलावा जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की सेनाओं ने भी अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास का मुख्य केंद्र बिंदु समुद्र की गहराइयों में छिपे संभावित खतरों की पहचान करना और उन्हें प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करने की संयुक्त क्षमता को विकसित करना था। कमांडर टास्क फोर्स 72 की मेजबानी में आयोजित इस युद्धाभ्यास ने जटिल समुद्री परिस्थितियों में मित्र देशों के बीच आपसी तालमेल को एक नए स्तर पर पहुँचाया है।
अभ्यास के दौरान तकनीकी कौशल और आधुनिक सैन्य उपकरणों का बेहतरीन समन्वय देखने को मिला। इसमें अमेरिकी नौसेना के अत्याधुनिक पी-8ए पोसाइडन विमानों के साथ भारतीय नौसेना, जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स, रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स और रॉयल न्यूजीलैंड एयर फोर्स के टोही विमानों ने हिस्सा लिया। युद्धाभ्यास को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों के करीब ले जाने के लिए एमके-30 नामक मोबाइल एंटी-सबमरीन ट्रेनिंग टारगेट का उपयोग किया गया, जिसके जरिए ट्रैकिंग ड्रिल और लाइव पनडुब्बी खोजी अभियान चलाए गए। साइपन के निकटवर्ती समुद्री क्षेत्रों में हुए इस अभ्यास में रिकवर किए जा सकने वाले एक्सरसाइज टॉरपीडो का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे सभी प्रतिभागी देशों की ऑपरेशनल क्षमता का विस्तार हुआ।
इस युद्धाभ्यास का एक दिलचस्प पहलू इसकी प्रतिस्पर्धात्मक प्रकृति रही, जिसमें विभिन्न देशों के प्रदर्शन का वास्तविक डेटा के आधार पर मूल्यांकन किया गया। इस वर्ष बेहतरीन प्रदर्शन के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित ड्रैगन बेल्ट अवॉर्ड जापान की पैट्रोल एंड रिकॉनिसेंस स्क्वाड्रन-3 ने अपने नाम किया, जो पिछले वर्ष ऑस्ट्रेलिया के पास था। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, 2019 से निरंतर आयोजित हो रहा यह अभ्यास अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का एक मजबूत मंच बन चुका है। इसमें भारत की सक्रिय भागीदारी न केवल इसकी बढ़ती रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह साझा सैन्य प्रयास भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को रोकने और मुक्त व सुरक्षित इंडो-पैसिफिक के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


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