सर्वे नंबर 243 से 250 तक की ये जमीन मिसिल बंदोबस्त 1940-41 से ही सरकारी थी।

भ्रष्टाचार निवारण स्पेशल कोर्ट पहुंचा मामला
कोर्ट ने लोकायुक्त से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, 
अगली सुनवाई आज 23 अप्रैल को 


ग्वालियर /ग्वालियर शहर के चेतकपुरी रोड स्थित कुलदीप नर्सरी , जीवाजी क्लब के पीछे की जमीन का मामला एक बार फिर से तूल पकड़ गया है.सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश अग्रवाल ने  भ्रष्टाचार निवारण स्पेशल कोर्ट में परिवाद दायर कर ललितपुर मौजे में
सर्वे नंबर 243 से 250 तक की भूमि मिसिल बंदोबस्त 1940-41 से ही सरकारी थी.. सर्वे नंबर 245 और 247 पर विशाल नहरें थीं.. 
जो बैजाताल और स्वर्णरेखा नदी को पानी देती थी.. सर्वे नंबर 244 पर सरकारी बाग दर्ज था.. वहीं सर्वे नंबर 248 और 250 पर सरकारी पुल बने हुए थे.. इस 5 हजार करोड़ की सरकारी जमीन को कूट रचित दस्तावेजों के जरिए खुर्द-बुर्द करने का अरोप लगाया है..  शिकायतकर्ता ने इस मामले में पहले लोकायुक्त में शिकायत की थी , लेकिन लोकायुक्त ने जब कुछ एक्शन नहीं लिया तो शिकायतकर्ता ने अपने वकील के माध्यम से न्यायालय में पेश किए गए आवेदन में साफ कहा गया है कि साल 1940 से सरकारी दस्तावेजों में नहर, बाग, पुल और सड़क के रूप में दर्ज, बेशकीमती जमीन को रसूखदारों और भ्रष्ट अफसरों ने मिलकर निजी संपत्ति बना डाला, आरोप है कि शहर के भू-माफियाओं ने जल संरक्षण की इन संरचनाओं को मिट्टी डालकर भर दिया और वहां अब आलीशान कॉलोनियां काटने की तैयारी की जा रही है.. पूरे शहर की नजर इस प्रोजेक्ट पर है. लेकिन नियम कायदों का कितना पालन हो रहा है,इसकी जवाबदेही किसी ने तय नहीं की है.. मामला साफ  है कि कहीं ना कहीं कुछ तो गल्लूघारा है..वहीं कोर्ट ने लोकायुक्त से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जहां दस्ताजों का अवलोकन करने के बाद कोर्ट अपना फैसला सुनाएंगा..मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी। शिकायतकर्ता के एडवोकेट अवधेश तोमर का कहना है कि लोकायुक्त को पूरे मामले की शिकायत की गई है और  मामले के तथ्य माननीय न्यायालय के समक्ष भी रखे जाएंगे। लेकिन इतने बड़े प्रोजेक्ट में कहीं ना कहीं बड़े लोगों के लिप्त  होने की खबरें भी सामने आ रही है. जिसका खुलासा होने पर तहलका मच सकता है।