‘शुभेंदु अधिकारी हैरी पॉटर नहीं हैं’, रिजु दत्ता का पश्चिम बंगाल सरकार पर बड़ा बयान
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित किए गए नेता रिजु दत्ता ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की नई शुभेंदु अधिकारी सरकार को लेकर एक बेहद संतुलित और चौंकाने वाला बयान दिया है। कोलकाता में बनी भारतीय जनता पार्टी की पहली सरकार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने साफ किया कि वे फिलहाल 'इंतजार करो और देखो' की नीति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई सरकार को अपनी नीतियां लागू करने और परिणाम देने के लिए समय दिया जाना चाहिए।
शुभेंदु अधिकारी कोई हैरी पॉटर नहीं हैं
एएनआई (ANI) से विशेष बातचीत के दौरान रिजु दत्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नवगठित बीजेपी सरकार का यह शुरुआती दौर एक 'हनीमून फेज' की तरह है। उन्होंने राजनीतिक माहौल के गर्माए होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि आलोचकों या जनता को अभी से किसी जल्दबाजी में किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए। विपक्ष के नेता से सूबे के मुख्यमंत्री और रणनीतिकार बने शुभेंदु अधिकारी का जिक्र करते हुए दत्ता ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी कोई हैरी पॉटर नहीं हैं, जो कोई जादुई छड़ी घुमाएंगे और बंगाल की दशकों पुरानी सारी समस्याएं एक झटके में गायब कर देंगे। सरकार को अपनी कार्यप्रणाली दिखाने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना जरूरी है।
नई कैबिनेट के शुरुआती फैसलों की सराहना
दत्ता ने वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर नई सरकार के शुरुआती प्रशासनिक कदमों की खुले दिल से तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में सरकार द्वारा लिए गए कई फैसले नीतिगत रूप से बेहद शानदार हैं और प्रशासन फिलहाल सही दिशा में कदम बढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, उन्होंने सचेत करते हुए यह भी जोड़ा कि केवल अच्छी शुरुआत ही काफी नहीं है, बल्कि सरकार को आने वाले समय में भी इसी रफ्तार और सकारात्मकता के साथ लगातार काम जारी रखना होगा।
वोटर लिस्ट में नाम कटने को हार का एकमात्र कारण मानना गलत
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपनी ही पुरानी पार्टी के रुख से अलग राय रखते हुए रिजु दत्ता ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के लिए केवल एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को दोष देना पूरी तरह से गलत होगा और ऐसा करना राज्य की जनता के जनादेश का सीधा अपमान करने जैसा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, जिनमें से 26 से 27 लाख मामलों की सुनवाई अब भी ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है। इन सबके बावजूद टीएमसी को कुल 41 प्रतिशत वोट मिले और भाजपा के साथ उसका अंतर लगभग 32 लाख वोटों का रहा।
रिकॉर्ड मतदान और जनता के फैसले का सम्मान जरूरी
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि इस सच को कोई नकार नहीं सकता कि इस बार बंगाल में इतिहास का सबसे रिकॉर्डतोड़ यानी 93 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो देश की आजादी के बाद से राज्य में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। ऐसे माहौल में यदि टीएमसी के नेता यह दलील देते फिरें कि वे हारे नहीं हैं बल्कि उन्हें प्रशासनिक एसआईआर प्रक्रिया ने हराया है, तो यह बंगाल की जागरूक जनता के लोकतांत्रिक फैसले को खारिज करने जैसा होगा। उन्होंने नसीहत दी कि पार्टी को अपनी कमियों को पहचानते हुए इस चुनावी शिकस्त को बेहद विनम्रता के साथ स्वीकार करना चाहिए।
टीएमसी की अंदरूनी राजनीति और कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार
रिजु दत्ता ने टीएमसी के आंतरिक संगठन और कार्यप्रणाली पर भी बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए। उन्होंने खुद को उन जमीनी नेताओं की फेहरिस्त में शामिल बताया जिन्हें पार्टी ने तरक्की करने पर खुद बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने हालिया समय में पार्टी से अलग हुए तपस रॉय और निसिथ प्रामाणिक जैसे कद्दावर नेताओं का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि ये लोग खुद अपनी मर्जी से पार्टी छोड़कर नहीं गए थे, बल्कि इन्हें पार्टी के भीतर मौजूद एक गुट द्वारा धक्का देकर जानबूझकर बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
सोशल मीडिया के भरोसे चुनावी जंग जीतने की सोच पर सवाल
उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर जमीनी हकीकत से दूर होने का आरोप लगाते हुए कहा कि संगठन अपने सबसे वफादार कार्यकर्ताओं को मुश्किल और हिंसक समय में अक्सर अकेला छोड़ देता है। दत्ता ने शीर्ष नेतृत्व को आईना दिखाते हुए कहा कि कोई भी बड़ी चुनावी लड़ाई केवल फेसबुक, ट्विटर या सोशल मीडिया के हैंडल्स पर नैरेटिव सेट करके नहीं जीती जा सकती। चुनावी मैदान में फतह हासिल करने के लिए जमीन पर एक मजबूत संगठन का होना और विपरीत परिस्थितियों में अपने अंतिम कार्यकर्ता के साथ खड़े रहना सबसे अनिवार्य शर्त होती है।
अनुशासनहीनता के आरोप में छह साल के लिए निलंबन
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस ने हाल ही में पार्टी विरोधी गतिविधियों, अनुशासन तोड़ने और अनुशासन समिति द्वारा भेजे गए समन का उचित जवाब न देने के आरोप में रिजु दत्ता को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया था। पार्टी की केंद्रीय इकाई द्वारा जारी निलंबन आदेश में कहा गया था कि दत्ता पिछले काफी समय से लगातार सार्वजनिक मंचों और मीडिया में पार्टी की नीतियों और शीर्ष नेतृत्व के फैसलों के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे, जिसके बाद यह दंडात्मक कार्रवाई की गई।


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