इंदौर की एक बियर फैक्ट्री द्वारा बी आई एस नियमों का उल्लंघन करते हुए गुणवत्ताहिन STOCK BEER का किया जा रहा है उत्पादन आबकारी विभाग किसी हादसे के इंतजार में
विशेष रिपोर्ट (गुरु शरण सिंह अहलूवालिया)
इंदौर। मध्य प्रदेश में शराब नीति तथा राजस्व पर मंथन किया जाता है परंतु उपभोक्ता की सुरक्षा के लिए शराब तथा बियर की गुणवत्ता पर कभी भी गंभीरता से विचार नहीं किया गया। सिटी टुडे को प्राप्त जानकारी अनुसार 20000 करोड रुपए प्रतिवर्ष सरकार को देने वाले आबकारी विभाग ने उपभोक्ता की सुरक्षा तथा बी. आई. एस. नियमों का उल्लंघन करने वाले शराब कारखाने के विरुद्ध कार्रवाई को क्या करना इसकी गुणवत्ता के लिए प्रदेश में एक भी लेबोरेटरी नहीं है। प्राप्त जानकारी अनुसार वर्तमान में मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी बियर सप्लाई करने वाली सोम डिस्टलरी विवादों के बाद बंद पड़ी होने से प्रदेश के अंदर जो तीन चार बियर उत्पादन की डिस्टलरी है उनमें से सबसे अधिक इंदौर की स्टॉक STOCK बियर का डिस्टलरी की क्षमता से अधिक उत्पादन होने के साथ प्रदेश में सर्वाधिक खपत हो रही है बताया जाता है कि 2023-- 2024 तक जिस स्टॉक बियर की 10 ,7777 पेटी की उत्पादन तथा खपत होती थी उस विवादित स्टॉक बियर की खपत 2026--27, 29 मई 2026 तक 60000 पेटीया की खपत हो गई। प्राप्त जानकारी अनुसार आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस स्टॉक बियर STOCK BEER की गुणवत्ता की जांच कभी नहीं करते। तकनीकी बिंदुओ अनुसार इस बियर फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता तथा तथा वर्तमान में वास्तविक किया गया उत्पादन, मेच्योरिटी डेट, PH वैल्यू का संतुलन, घुलित ऑक्सीजन की नियत्रित मात्रा, स्वाद, कार्बोनेशन का मानक स्तर के अतिरिक्त माइक्रो बायोलॉजिकल स्थिरता की जांच की जाए तो यह बीयर जन स्वास्थ्य पर उसे सवालों के तहत पेय योग्य नहीं बताई जाती परंतु आबकारी अधिकारी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करते और ना ही मध्य प्रदेश के अंदर बी आई एस के अलावा बियर/ शराब की गुणवत्ता के लिए लेबोरेटरी शुरू करने के लिए कोई पहल नहीं करते क्योंकि ढोल में पोल सब की छिपी है। सिटी टुडे को प्राप्त जानकारी अनुसार इस संबंध में इंदौर के एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा भारतीय मानक ब्यूरो को लिखित सिकाई भी की गई है परंतु समाचार लिखे जाने तक 3 महीने से कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी बताया जाता है कि अब इस प्रकरण को जन स्वास्थ्य तथा जनहित के मुद्दों के तहत जल्दी ही माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका ग्वालियर में लगाये जाने के संकेत हैं।


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