अब कांग्रेस के होंगे भाजपा के कमलनाथ  क्यों कांग्रेस की सक्रिय राजनीति से बनाई दूरी,भाजपा नेताओं से मेल मिलाप। 1984 सिख नरसंहार के कारण उनका नाम राज्यसभा में विचार नहीं किया गया।
पुत्र के राजनीतिक भविष्य की सता रही है चिंता।

अखिलेश दुबे

कांग्रेस  नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर फिर चर्चा जोरों पर है वजह है सक्रिय राजनीति से नाथ का किनारा और भाजपा नेताओं से मेल मिलाप साथ ही राज्यसभा को लेकर नाम पर चर्चा जोरों पर थी प्रयास भी किया परंतु उन पर 1984 के सिख नरसंहार का आरोप होने के कारण भाजपा ने उनसे दूरी बनाई दरअसल नाथ समर्थकों की मंशा थी कि उनको मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजा जाये उम्मीद भी की गई पर जब मीनाक्षी नटराजन के नाम का ऐलान हुआ तो नाथ समर्थक मायूस हो गए वहीं लंबे समय से सक्रिय भूमिका से दूरी पर भी चर्चा है कांग्रेस दफ्तर तो आना दूर नाथ राजधानी भोपाल में भी एक आध बार छोड़ दूर ही रहते है तो आखिर क्या वजह है वैसे हम बताते चलें नाथ की भाजपा नेताओं से करीबी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं खबर तो यह भी है कि पुत्र के राजनैतिक भविष्य को लेकर चिंतित नाथ पुत्र सहित कमल के कमलनाथ हो सकते हैं जो फिलहाल तो सिर्फ एक अटकल के साथ भविष्य के गर्भ में  ही दिख रही है असल कुछ होगा तो छिपेगा थोड़े ही सबके सामने आ ही जाएगा अब चर्चा का क्या है राजनीति में चर्चा होना आम बात है। कमलनाथ के नजदीकी सूत्रों के अनुसार स्वर्गीय इंदिरा गांधी के तीसरे पुत्र के नाम से प्रसिद्ध कमलनाथ जीवन के राजनीतिक रूप से आखरी पड़ाव पर मान चुके हैं कि दिग्विजय सिंह का पुत्र मोह उनके स्वयं के पुत्र नकुलनाथ के रास्ते में सदा पत्थर बना रहेगा इसलिए कमलनाथ पुत्र के राजनीतिक भविष्य के लिए भाजपा में पुत्र का प्रवेश ही उचित मानते हैं।