जबलपुर।   खंडपीठ जबलपुर उच्च न्यायालय के माननीय जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने राज्य सरकार को उन तत्कालीन राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय (Departmental) और आपराधिक (Criminal) कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दी है, जिन्होंने सरकारी भूमि से जुड़े मुकदमे की जानकारी होने के बावजूद उसकी प्रभावी पैरवी नहीं की और लगभग 12 वर्ष की देरी से अपील दायर की। मामला सरकारी भूमि पर स्वामित्व से जुड़े एक सिविल विवाद का था। रिकॉर्ड से स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार को मुकदमे की पूरी जानकारी थी और राज्य की ओर से वकील कई सुनवाई में उपस्थित भी हुए थे। एक समय पर एकतरफा कार्यवाही को निरस्त भी कराया गया, लेकिन उसके बाद फिर से राज्य की ओर से कोई प्रभावी पैरवी नहीं की गई। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2004 में एकतरफा डिक्री पारित कर दी, जबकि राज्य सरकार ने उसके विरुद्ध वर्ष 2016 में अपील दायर करते हुए देरी माफ करने का अनुरोध किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि देरी माफ करने के लिए राज्य कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर सका। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब राज्य को मुकदमे की जानकारी थी और उसके अधिकारी व अधिवक्ता कार्यवाही में शामिल भी रहे, तब 12 वर्षों तक निष्क्रिय बने रहना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का परिचायक है। न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी भी मुकदमे में पक्षकारों के अधिकार अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखे जा सकते और इतनी लंबी देरी को सामान्य रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। अपने महत्वपूर्ण निर्णय में जस्टिस विवेक जैन ने 'Public Trust Doctrine' (जनता के विश्वास का सिद्धांत) का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सार्वजनिक भूमि का स्वामी नहीं बल्कि जनता का ट्रस्टी है। इसलिए सरकारी भूमि की सुरक्षा करना राज्य और उसके अधिकारियों की संवैधानिक एवं नैतिक जिम्मेदारी है। यदि अधिकारी इस दायित्व के निर्वहन में घोर लापरवाही बरतते हैं तो यह जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सरकारी कर्मचारी "राज्य का दिल और जान" होते हैं और उनसे अपने कर्तव्यों के प्रति सर्वोच्च स्तर की जवाबदेही अपेक्षित है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने अपीलीय अदालत द्वारा 12 वर्ष की देरी को माफ करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया तथा राज्य सरकार को तत्कालीन कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक (Revenue Inspector), पटवारी सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उपयुक्त विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई प्रारंभ करने की अनुमति प्रदान की।

Case Title: Ramrati v. State of Madhya Pradesh | CR-47-2017

यह निर्णय सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही और प्रशासनिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नज़ीर के रूप में देखा जा रहा है।