भरत रावत, संवाददाता, डबरा
दिनांक: 28 जून 2026
एंकर

मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में एक बार फिर प्रशासनिक फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मई 2026 में तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी ग्वालियर हरिओम चतुर्वेदी को गंभीर कदाचरण के आरोप में निलंबित किया गया था। अब करीब एक महीने बाद उन्हें लोक शिक्षण संचालनालय ग्वालियर में संयुक्त संचालक यानी जेडी की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस नियुक्ति के बाद विभागीय कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

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लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह द्वारा मई 2026 में जारी निलंबन आदेश में कहा गया था कि हरिओम चतुर्वेदी, जिनका मूल पद सहायक संचालक है, का आचरण म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 के उपनियम (1), (2) एवं (3) के विपरीत पाया गया। आदेश में इसे गंभीर कदाचरण की श्रेणी में रखते हुए उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई थी।

अब निलंबन के लगभग एक महीने बाद हरिओम चतुर्वेदी को संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय ग्वालियर का दायित्व दिए जाने से विभागीय हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सवाल यह उठ रहा है कि जिन आरोपों के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई थी, उनका क्या निष्कर्ष निकला और किन परिस्थितियों में उन्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, यदि विभाग द्वारा निलंबन समाप्त कर विधिवत बहाली एवं पदस्थापना का आदेश जारी किया गया है, तो वह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाएगा।