इन्द्रेश कुमार ने बताए समान नागरिक संहिता के फायदे, कहा- देश की एकता को मिलेगी मजबूती
रायपुर| समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर देशव्यापी चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के तत्वावधान में एक अत्यंत महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य किसी भी धर्म विशेष की आंतरिक परंपराओं या रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप करना बिल्कुल नहीं है, बल्कि इसका एकमात्र लक्ष्य नागरिक कानूनों में एकरूपता लाना और सामाजिक सुधार सुनिश्चित करना है।
धार्मिक आस्था, नमाज, रोजा और निकाह की रस्में रहेंगी पूरी तरह सुरक्षित
इंद्रेश कुमार ने देश के वर्तमान माहौल और आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि UCC के अमल में आने के बाद भी सभी मजहबों के मानने वालों को अपनी धार्मिक मान्यताओं, पूजा-पद्धति, नमाज, रोजा, हज और निकाह की मजहबी रस्मों को निभाने की शत-प्रतिशत आजादी रहेगी।
उन्होंने कहा, "समान नागरिक संहिता का सीधा सरोकार देश के नागरिक अधिकारों और कानूनों से है, न कि किसी की व्यक्तिगत आस्था से।" उन्होंने कुछ राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अपने वोट बैंक और निजी हितों के लिए समाज में यूसीसी को लेकर डर और भ्रम का माहौल पैदा कर रहे हैं। प्रबुद्ध समाज की यह जिम्मेदारी है कि वे इसके वास्तविक और कानूनी पहलुओं को समझकर आम जनता तक सही जानकारी पहुंचाएं।
शिक्षा और देश के कानून के सम्मान का दिया संदेश: 'कुरान का पहला शब्द इकरा'
अपने व्याख्यान में इंद्रेश कुमार ने मुस्लिम समाज में शिक्षा के प्रसार पर विशेष बल दिया। उन्होंने पवित्र ग्रंथ का हवाला देते हुए कहा, "कुरान शरीफ का पहला ही शब्द 'इकरा' है, जिसका सीधा अर्थ है 'पढ़ो'। यह इस बात का प्रमाण है कि इस्लाम ज्ञान और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।" उन्होंने समाज के सभी जिम्मेदार लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों, विशेषकर बेटियों की उच्च शिक्षा को प्राथमिकता दें, क्योंकि एक शिक्षित समाज ही राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि पैगंबर साहब ने भी सीख दी है कि आप जिस मुल्क में रहते हैं, वहां के कानूनों का सम्मान करें और अपनी मातृभूमि से वफादारी व मोहब्बत रखें। इसलिए समाज को अपनी मजहबी तालीम के साथ-साथ देश के संवैधानिक मूल्यों को भी सहर्ष अपनाना चाहिए।
सवाल-जवाब सत्र में दूर किए गए मन के संशय
परिचर्चा के दूसरे चरण में एक खुली प्रश्नोत्तर संगोष्ठी (क्वेश्चन-आंसर सेशन) का आयोजन हुआ, जिसमें उपस्थित बुद्धिजीवियों और युवाओं ने समान नागरिक संहिता को लेकर अपने मन के संशय और सवाल इंद्रेश कुमार के सामने रखे।
सवालों का तार्किक जवाब देते हुए उन्होंने समझाया कि UCC का मतलब अपनी धार्मिक पहचान या सांस्कृतिक विरासतों को छोड़ना या बदलना कतई नहीं है। इसका उद्देश्य केवल विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति के अधिकार जैसे दीवानी (नागरिक) मामलों में सभी नागरिकों को समान अधिकार देना है। समय के साथ अलग-अलग समुदायों में जो कानूनी विसंगतियां और कुरीतियां पैदा हो गई हैं, उन्हें दूर करने के लिए समान नागरिक संहिता एक बेहतरीन और प्रभावी संवैधानिक व्यवस्था साबित होगी।
मस्जिदों के मुतवल्ली और विभिन्न समुदायों के प्रमुख लोग रहे मौजूद
इस ऐतिहासिक परिचर्चा की अध्यक्षता रायपुर शहर की जामा मस्जिद के मुतवल्ली हाजी मोहम्मद इकबाल (मुन्ना) ने की। कार्यक्रम में राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए मस्जिदों के मुतवल्ली, मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध प्रतिनिधि, उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच छत्तीसगढ़ के प्रांत संयोजक यूनुस कुरैशी ने किया। इस गौरवमयी अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, महामंडलेश्वर महाराज अजय राम जी, स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत संयोजक जगदीश पटेल सहित सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक जगत से जुड़ी कई नामचीन हस्तियों ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।


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