मप्र हाईकोर्ट ने पदोन्नति मामले में स्थगन (स्टे) देने से किया इनकार 

* बहस में सामान्य वर्ग की और से पूर्व न्यायधीश के समक्ष बहस का वीडियो दिखाने की भी बात कही गई |
* आजक्स संघ की ओर  से स्थगन आवेदन का  जोरदार खंडन करते हुए कहा गया की उक्त मामलो में पूर्व में नहीं था कोई स्टे /स्थगन  
* सरकार की ओर से महाधिवक्ता द्वारा प्रकरण में बहस करने  तथा  स्टे आवेदन के जबाब हेतु माँगा एडिशनल एडवोकेट जनरल ने समय !
* हाईकोर्ट ने प्रमोशन नियमो पर स्थगन देने से किया साफ इंकार कहा की पूर्व  मे नहीं था स्टे अब इस स्टेज पर नहीं लागे जा कटी रोक क्युकी सरकार ने पूर्व से समस्त प्रदौन्न्तीयो को किया है हाईकोर्ट के अधीन  ! 

भोपाल। प्रमोशन में आरक्षण के 6 मामलो की आज दिनांक ७ जुलाई 26 को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश श्री, विवेक रूशिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंड पीठ द्वारा की गई | मामला मध्य प्रदेश के बहुचर्चित प्रमोशन में आरक्षण मामले में मंगलवार 7 जुलाई को हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान गरमागरम  बहस हुई सामान्य वर्ग की और से  सरकार पर प्रमोशन की तैयारी और महाधिवक्ता के पुराने मौखिक आश्वासन से पीछे हटने का आरोप लगाया प्रमोशन में आरक्षण मामले में हाईकोर्ट में तीखी बहस हुई सरकार ने महाधिवक्ता की अनुपलब्धता का हवाला देकर समय मांगा सामान्य वर्ग ने महाधिवक्ता के पुराने मौखिक आश्वासन का वीडियो दिखाने की भी बात कही | अजाक्स संघ की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, ने कहा कि प्रमोशन पर माननीय हाईकोर्ट की कोई लिखित में रोक नहीं है, अधिवक्ता ने यह भी कहा कि याचिका कर्ता  अपने मूल विभाग से दुसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ है जो अपने मूल विभाग बापिस जाना नहीं चाहते जिनको संभावना है की यदि  पदोन्नति होती है तो उन्हें उनके मूल विभाग जाना पडेगा इसलिए याचिका कर्ताओ द्वारा प्रमोशन नियमो को चुनोती दी गई है वास्तविक रूप से इनकी याचिकाओ को देखा जाए तो नियमो के किसी भी प्रावधान को बताने में असफल रहे है की किस प्रकार उक्त नियम असंवैधानिक है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को यह भी बताया की आजक्स संघ की और से अप्रेल 2025 में याचिका दाखिल कर स्रार्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेशो के अनुरूप समस्त कर्मचारियों के प्रमोशन करने की राहत चाही गई थी , सरकार ने उक्त याचिका क्रमांक १६३८३/२०२५ के लंबित रहने के दौरान जून 2025 में पदौन्नति नियम बनाए गए है जो सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को फेयरली यह भी बताया की उक्त नियमो के कुछ नियम है जो अनारक्षित पदों पर मेरिटोरियस कर्मचारियों को रोकता है फिर भी आजाक्स संघ उक्त नियमो के समर्थन में है | अतिरिक्त महाधिवक्ता जन्ह्बी pandit ने महाधिवक्ता के नाम पर अगली तारीख पर सुनवाई का अनुरोध किया गया साथ ही अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा यह भी कहा गया कि इस दिन मामले के गुण दोष पर कोई तर्क नहीं रखे जा सके विस्तृत पक्ष महाधिवक्ता अगली सुनवाई में प्रस्तुत करेंगे प्रमोशन आदेशों को लेकर सरकार पर आरोप लगाते हुए याचिका करता के अधिवक्ता मनोज शर्मा ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने दावा किया कि पिछली रात विधानसभा से 15 विभागों के प्रमोशन आदेश जारी किए गए हैं उन्होंने अदालत को यह बताने का प्रयास किया कि महाधिवक्ता द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष मौखिक आश्वासन दिया था की अंतिम निर्णय आने तक इन नियमों के तहत डीपीसी नहीं की जाएगी इन सारे तर्कों का खंडन करते हुए आजाक्स  संघ की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर ने न्यायालय को अवगत कराया की माननीय न्यायालय के रिकॉर्ड के किसी भी आदेश पत्रिका में प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक से संबंधित कोई आदेश पारित नहीं किया गया है ना ही पदोन्नति नियम 2025 के प्रवर्तन  पर माननीय न्यायालय द्वारा किसी भी प्रकार की रोक लगाई गई है | मामलो की अगली सुनवाई दिनांक 13 जुलाई नियत की गई है |