MP विधानसभा में जयवर्धन सिंह का सरकार पर हमला, बोले- UCC से पहले लागू हो यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ही विधानसभा परिसर में सियासी गरमागरम माहौल देखने को मिला। कार्यवाही शुरू होने से पहले ही कांग्रेस पार्टी के विधायकों और नेताओं ने किसानों से जुड़ी समस्याओं, युवाओं के रोजगार, शिक्षा व्यवस्था और लगातार सामने आ रहे भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।
शिक्षा और रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा: जयवर्धन सिंह
सत्र के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश के युवाओं की सबसे बड़ी चिंता आज गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पक्का रोजगार है, लेकिन सरकार उनकी इन मूल समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय अन्य मुद्दों पर ज्यादा जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार के अवसर देने, भर्ती परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने जैसे गंभीर विषयों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
'यूनिफॉर्म सिविल कोड से पहले यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड लाएं'
सरकार द्वारा लाए जा रहे यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर निशाना साधते हुए जयवर्धन सिंह ने कहा कि आज का युवा अपनी आवाज उठाते हुए यूसीसी (UCC) की नहीं, बल्कि 'यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड' (समान शिक्षा संहिता) की बात कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासनकाल में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं, जिससे शिक्षित युवाओं का बड़े पैमाने पर शोषण हो रहा है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार वास्तव में समाज में समानता लाने की बात करती है, तो उसे सबसे पहले राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सभी वर्गों के लिए समान और बेहतर अवसर सुनिश्चित करने चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को यूनिफॉर्म सिविल कोड से पहले यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड लागू करने पर विचार करना चाहिए।
मोहन कैबिनेट ने दी है यूसीसी के ड्राफ्ट को मंजूरी
बता दें कि हाल ही में 19 जुलाई को मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के प्रस्तावित ड्राफ्ट को सर्वसम्मति से अपनी हरी झंडी दे दी थी। राज्य सरकार की योजना इस मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक को सदन में पेश करने की है। इस प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों में सभी समुदायों के लिए एक जैसे नियम लागू करने का प्रावधान शामिल है। सरकार का तर्क है कि इससे नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे, जबकि विपक्ष का कहना है कि प्रदेश में किसानों की बदहाली, बेरोजगारी और शिक्षा से जुड़े मुद्दे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं जिन पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।


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