NEET पेपर लीक के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन, नवापारा में छात्रों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
नवापारा। देशभर में नीट (NEET) परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों की आंच अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित संसद घेराव आंदोलन के समर्थन में नवापारा में भी छात्र और युवा संगठन सड़कों पर उतर आए। खराब मौसम और मूसलाधार बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बस स्टैंड पर इकट्ठा होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से उनके पद से इस्तीफा देने की मांग की।
मूसलाधार बारिश के बीच सड़कों पर उतरे छात्र
खराब मौसम और तेज बारिश की परवाह किए बिना बड़ी संख्या में छात्र और युवा इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शनकारियों ने रोष व्यक्त किया कि बार-बार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं से देश के लाखों मेधावी छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। उनका आरोप था कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही का भारी अभाव है, जिसके कारण कड़ी मेहनत करने वाले योग्य अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
परीक्षा में गड़बड़ी पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि एनईईटी जैसी देश की इतनी महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में बार-बार इस तरह की अनियमितताएं सामने आना अत्यंत गंभीर और चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि पर्दे के पीछे छिपे दोषियों को बेनकाब करके उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने की पुरजोर मांग
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना था कि परीक्षा तंत्र में लगातार हो रही विफलताओं और गड़बड़ियों की जवाबदेही शीर्ष स्तर पर तय होनी चाहिए।
आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी
छात्र संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार द्वारा जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक और तीव्र किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और उनके सपनों से जुड़ा हुआ गंभीर सवाल है।


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