नेपाल बाढ़ में बढ़ा मौत का आंकड़ा, 939 शव मिले; 4 हजार से ज्यादा की तलाश जारी
देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में मनचाही जगह तबादला कराने के लिए शिक्षिकाओं द्वारा 'कागजी तलाक' लेने की अनोखी और चौंकाने वाली पैंतरेबाज़ी सामने आई है। हालिया 1500 से अधिक अध्यापकों के तबादलों के दौरान ऐसे कई संदिग्ध मामलों का भंडाफोड़ हुआ है। राज्य में कड़ा स्थानांतरण कानून लागू होने के बाद भी 18 से 20 सालों से अति-दुर्गम इलाकों में तैनात कई महिला शिक्षक मैदानी क्षेत्रों में नहीं लौट पा रही थीं। इस बार विभाग ने स्थानांतरण अधिनियम की धारा 17 (1) (ख) के तहत असाध्य बीमारी, विधवा, विधुर और तलाकशुदा जैसी विशेष श्रेणियों में छूट का प्रावधान किया था। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सुगम इलाकों में पोस्टिंग हथियाने के लिए कुछ शिक्षिकाओं ने कानूनन पति से कागजी अलगाव का ड्रामा रचा। इस फर्जीवाड़े की पोल तब खुली जब कागजों में तलाक ले चुकीं शिक्षिकाओं को उनके पति ही खुद गाड़ियों से स्कूल छोड़ने पहुंचने लगे।
दुर्गम की कठिन स्थितियों से बचने के लिए अपनाया शॉर्टकट
विभागीय सूत्रों के अनुसार, सालों तक विषम भौगोलिक और दुर्गम परिस्थितियों में सेवाएं देने के बावजूद जब नियमानुसार सुगम स्थानों पर नियुक्ति का रास्ता साफ नहीं हुआ, तो शिक्षिकाओं ने यह कागजी रास्ता अख्तियार किया। यह घटना दर्शाती है कि दुर्गम क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों से छुटकारा पाने के लिए कर्मचारी किसी भी हद तक जाने को मजबूर हैं। वहीं, इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी संदिग्ध मामलों की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं और फर्जीवाड़ा साबित होने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
पहाड़ चढ़ने से बचते रहे रसूखदार और वीआईपी शिक्षक
एक तरफ जहां दुर्गम में तैनात शिक्षिकाएं मैदानी इलाकों में आने के लिए ऐसे रास्ते अपना रही हैं, वहीं विभाग में कई ऐसे असरदार शिक्षक भी हैं जो अपनी पूरी नौकरी के दौरान कभी पहाड़ चढ़े ही नहीं। इनमें प्रभावशाली और वीआईपी परिवारों से ताल्लुक रखने वाले शिक्षक शामिल हैं, जो पिछले 20 से 25 वर्षों से देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जैसे सुगम और पसंदीदा जिलों के स्कूलों में ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
बीमार परिजनों की आड़ में तबादले पर सख्त हुआ विभाग
विभाग ने इस बार माता-पिता और सास-ससुर की गंभीर बीमारी की आड़ में भी बड़ी संख्या में शिक्षिकाओं के अनुरोध पर तबादले मंजूर किए हैं। हालांकि, इस व्यवस्था के अनुचित लाभ को रोकने के लिए विभाग ने नियम सख्त कर दिए हैं। अब संबंधित शिक्षिकाओं को अपने स्कूल के प्रधानाचार्य के पास एक कानूनी शपथ पत्र जमा करना होगा, जिसमें यह स्पष्ट रूप से वचन देना होगा कि वे बीमार परिजनों की देखभाल करेंगी। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि शपथ पत्र की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित शिक्षिका का स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा।


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