दतिया, 25 मई 2026 — जब एक छोटी-सी विधानसभा सीट पूरे प्रदेश की सियासी दिशा तय करने लगे, तो समझ लीजिए कि हवा बदल रही है। दतिया उपचुनाव अब महज सीट बचाने या हारने का मामला नहीं रहा। यह BJP के लिए बदले की आग बुझाने और कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन गया है।

कहानी कहाँ से शुरू हुई?

2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया ने सनसनी मचा दी थी। तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा — BJP के सबसे मजबूत चेहरे में से एक — को कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने मात्र 7,742 वोटों के अंतर से हरा दिया था। यह BJP के लिए व्यक्तिगत और संगठनात्मक दोनों स्तर पर झटका था। अब वक्त का चक्र घूम गया है। राजेंद्र भारती की अदालत से सजा के बाद सदस्यता समाप्त हो चुकी है। चुनाव आयोग ने EVM-VVPAT की First Level Checking आज 25 मई से शुरू कर दी है। अधिसूचना जल्द आने वाली है। उपचुनाव लगभग तय है।

नरोत्तम मिश्रा की कमबैक स्टोरी

मेरी समझ से यह सीट नरोत्तम मिश्रा के लिए राजनीतिक पुनर्वास का सबसे बड़ा मौका है। 

- पिछले दिनों मिश्रा की मौजूदगी में 500 से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ता (कई युवा और क्षत्रिय चेहरे) BJP में शामिल हुए। कांग्रेस इसे "मामूली दलबदल" बता रही है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट्स कहती हैं कि यह कांग्रेस की लोकल संरचना को काफी नुकसान पहुंचा रहा है।

- नरोत्तम मिश्रा अब "वापसी का प्रतीक" बनकर उभर रहे हैं। बंद कमरों में मुलाकातें, क्षत्रिय समाज को जोड़ने की कोशिशें और संगठनात्मक तैयारियां तेज हो गई हैं।

कांग्रेस की दुविधा

कांग्रेस शिविर में अभी भी बेचैनी साफ दिख रही है:

- राजेंद्र भारती का परिवार टिकट की दौड़ में सक्रिय है। भारती के बेटे की दिल्ली दौड़ और दिग्विजय सिंह-जैसे वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातें हो रही हैं।

- पार्टी परिवारवाद के आरोपों से घिरी हुई है। स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है।

- अगर कांग्रेस मजबूत उम्मीदवार नहीं उतार पाई या दलबदल की लहर रुकी नहीं, तो यह सीट बचाना बेहद मुश्किल होगा।

यह उपचुनाव क्यों गेम चेंजर है?

1. BJP के लिए: अगर नरोत्तम मिश्रा भारी अंतर से जीतते हैं, तो 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले "कांग्रेस खत्म हो रही है" का नैरेटिव पूरे प्रदेश में मजबूत हो जाएगा। CM मोहन यादव सरकार को भी नया जोश मिलेगा।
   
2. कांग्रेस के लिए: यह सीट हारना मतलब विपक्षी एकता और पार्टी की ग्रामीण पकड़ पर सवालिया निशान। जीत हुई तो 2028 तक की राह थोड़ी आसान हो सकती है।

3. मुद्दे: गर्मी, पानी का संकट, किसानों की समस्याएं और स्थानीय जातीय समीकरण (खासकर क्षत्रिय वोट) इस बार निर्णायक साबित होंगे।

एक स्वतंत्र पत्रकार की नजर से:

BJP की जीत की संभावना फिलहाल 68-75% के आसपास दिख रही है। सत्ता का फायदा, दलबदल और नरोत्तम मिश्रा का व्यक्तिगत प्रभाव भारी पड़ सकता है। लेकिन राजनीति में आखिरी वोट पड़ने तक कुछ भी हो सकता है।