राजयोग से जीवन में बढ़ेगा प्रेम और संतुलन - बीके आदर्श दीदी
संवाद, सहनशीलता और क्षमा भाव मजबूत संबंधों की नींव है - बीके प्रहलाद भाई
हेलीपेड कॉलोनी में संबंधों में मधुरता, राजयोग ध्यान अनुभूति के साथ भजन संध्या का हुआ आयोजन
ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा श्री हनुमान जी मंदिर पार्क, हेलीपेड कॉलोनी में संबंधों में मधुरता विषय पर एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन राजयोग ध्यान अनुभूति और भजन संध्या के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रह्माकुमारीज़ केन्द्र प्रमुख ब्रह्माकुमारी आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, हेलीपेड कॉलोनी से पूर्व पार्षद विन्ती शर्मा, डॉ वी के जैन, डॉ के के तिवारी,भारतेन्दु गुप्ता, बंटी गंगोत्रा उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत राजयोग ध्यान से की गई, जिसमें उपस्थितजनों को गहन आत्मिक शांति और आंतरिक स्थिरता का अनुभव कराया गया। जिसमें सभी ने अपने मन को सकारात्मक संकल्पों से भरते हुए जीवन में परिवर्तन लाने का अनुभव किया। वहीं भजन संध्या ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। इस अवसर पर राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि आज के समय में संबंधों में मधुरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने बताया कि संबंधों को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले स्वयं के विचारों को शुद्ध और सकारात्मक बनाना आवश्यक है। जब व्यक्ति स्वयं शांत और संतुलित होता है, तभी वह दूसरों के साथ प्रेम, सम्मान और सहयोग का व्यवहार कर सकता है। दीदी ने आगे कहा कि राजयोग ध्यान के नियमित अभ्यास से मनुष्य अपने क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण पा सकता है, जिससे संबंधों में सहज ही मिठास और विश्वास बढ़ता है। उन्होंने सभी को जीवन में आध्यात्मिकता को अपनाने और संबंधों को प्रेममय बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में मोटिवेशनल स्पीकर बीके प्रहलाद भाई ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग अपनों के लिए समय नहीं निकाल पाते, जिससे रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि संवाद, समझदारी, धैर्य, सहनशीलता और क्षमा भाव ही मजबूत संबंधों की नींव हैं। उन्होंने कहा कि संवाद किसी भी रिश्ते की सबसे पहली और मजबूत कड़ी होता है। जब हम अपने मन की बात खुलकर और सही तरीके से सामने वाले से कहते हैं, तो गलतफहमियां दूर होती हैं। सुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना बोलना। समझदारी और धैर्य का मतलब है सामने वाले की भावनाओं, परिस्थितियों और नजरिए को समझते हुए धैर्य से कार्य लेना। हर व्यक्ति की सोच अपनी हैं।
छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना चाहिए
जीवन में कई प्रकार के उतार-चढ़ाव आते हैं, ऐसे में सहनशीलता बहुत जरूरी होती है। गुस्से में प्रतिक्रिया देने से बचना, गलतियों को माफ करना सीखना। यदि हम स्वयं को बदलते हैं, तो हमारे संबंध स्वतः ही बेहतर हो जाते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि हम अपने दिन की शुरुआत रोज परमात्मा की याद से करें तो हमारा पूरा दिन निश्चित ही सफल व्यतीत होगा और रात में सोते से पहले भी अपने को देखें कि हमसे कोई भूल तो नहीं हुई। यदि हुई हैं तो सम्बंधित व्यक्ति से बात करके या ईश्वर से क्षमा मांगकर फिर सोना चाहिए। इस अवसर पर विनती शर्मा, डॉ केके तिवारी, डॉ वी के जैन ने भी अपनी शुभकामनायें रखीं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया तथा अपने जीवन में संबंधों को मधुर और सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अखिलेश द्विवेदी और उनकी टीम ने भजनों कि सुन्दर प्रस्तुति दी, साथ ही कॉलोनी के ही दो छोटी बच्ची अनाया तोतलानी, ख्याति आचार्य ने सुन्दर सांस्कृतिक नृत्य के माध्यम से सभी का मन मोहा। इस अवसर पर कार्यक्रम में रेखा गंडोत्रा, रजनी नागवानी, अंकिता जसेजा, कंचन गाबरा, गीता तिवारी, सावी केसवानी, कविता जेतवानी, मोना चांदवानी, मंजू गंडोत्रा, गीता गाबरा, पूजा गाबरा, मोहिता पंजवानी, नेहा केसवानी, योगेश जैसेजा, पंकज टहलवानी सहित अनेकानेक महिलाओं, युवाओं एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक रहा।


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