चीन ने रोकी हीलियम की सप्लाई, भारत पर असर कितना?
नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और आपूर्ति संकट के बीच चीन ने महत्वपूर्ण गैस हीलियम के निर्यात पर अस्थायी रोक लगाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मचा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पहले से ही बाधित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के मद्देनजर चीन का यह कदम कई सवाल खड़े कर रहा है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और चिकित्सा उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा? और सबसे महत्वपूर्ण, भारत पर इस निर्णय का कितना और कैसा असर होगा?
चीन के वाणिज्य मंत्रालय और सीमा शुल्क एजेंसी ने विदेशी व्यापार कानून के तहत हीलियम के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की घोषणा की है। हालांकि, इस अस्थायी प्रतिबंध के पीछे के कारणों को विस्तार से नहीं बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे घरेलू उद्योगों की जरूरतों को सुरक्षित करने के कदम के रूप में देख रहे हैं। ईरान युद्ध के कारण फरवरी के अंत से ही वैश्विक हीलियम आपूर्ति प्रभावित हुई है और इसकी कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
हीलियम एक अत्यंत महत्वपूर्ण गैस है, जिसका उपयोग केवल सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्माण में ही नहीं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में एमआरआई मशीनों को ठंडा रखने जैसे संवेदनशील कार्यों में भी होता है। वैश्विक स्तर पर हीलियम की उपलब्धता सीमित होने और इसके दाम बढ़ने से एमआरआई जैसी चिकित्सा प्रक्रियाएं महंगी हो सकती हैं, वहीं सेमीकंडक्टर उत्पादन की लागत भी बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर पड़ेगा। यहां यह समझना महत्वपूर्ण है कि चीन खुद हीलियम का कोई बड़ा निर्यातक नहीं है। वह दुनिया के कुल हीलियम उत्पादन का मात्र 1.6 प्रतिशत हिस्सा ही पैदा करता है और अपनी 80 प्रतिशत से अधिक हीलियम की जरूरतों को आयात के जरिए पूरा करता है, मुख्य रूप से कतर जैसे देशों से। इसलिए, चीन के इस कदम का वैश्विक हीलियम बाजार पर सीधा और व्यापक प्रभाव सीमित ही रहने का अनुमान है, लेकिन यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की नाजुकता को जरूर उजागर करता है।
भारत के लिए हीलियम एक महत्वपूर्ण आयातित वस्तु है, क्योंकि वह अपनी कुल जरूरत का 100 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। भारत अपनी हीलियम की 50 प्रतिशत से अधिक जरूरत कतर से पूरी करता है, जबकि रूस और अमेरिका भी उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हैं। अच्छी बात यह है कि भारत चीन से हीलियम का आयात नहीं करता है, क्योंकि चीन स्वयं अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर है। इस प्रकार, चीन के हीलियम निर्यात पर प्रतिबंध का भारत पर सीधा असर लगभग नगण्य है। हालांकि, अगर वैश्विक स्तर पर हीलियम की कीमतें बढ़ती हैं और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला अधिक बाधित होती है, तो इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव भारत के उन उद्योगों पर पड़ सकता है जो हीलियम पर निर्भर हैं। इससे भारत में एमआरआई और सेमीकंडक्टर उत्पादन की लागत में वृद्धि देखी जा सकती है। यह घटना एक बार फिर विभिन्न देशों को अपनी महत्वपूर्ण संसाधनों की आत्मनिर्भरता और आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण की दिशा में सोचने पर मजबूर करेगी।


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