'कागजों के विद्यार्थी’ खा गए सरकारी खजाना, स्कूल ने झाड़ा पल्ला

1.19 लाख की छात्रवृत्ति पर बड़ा घोटाला उजागर, एफआईआर से मचा हड़कंप

फर्जी सत्यापन, कूटरचित दस्तावेज और संदिग्ध आवेदनों की परतें खुलनी शुरू    

( सुनील श्रीवास्तव)

भिण्ड। अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं में कथित फर्जीवाड़े का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी खजाने से छात्रवृत्ति की राशि निकालने के लिए ऐसे छात्रों का सहारा लिया गया, जो स्कूल के रिकॉर्ड में कभी पढ़े ही नहीं। खुलासे के बाद शिक्षा और छात्रवृत्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मालनपुर थाना पुलिस ने जांच रिपोर्ट के आधार पर मेरी गोल्ड पब्लिक स्कूल से जुड़े प्रकरण में इंस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर शिवम कुमार, हेड ऑफ इंस्टीट्यूट विक्रम सिंह तथा अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार भारत सरकार की प्री-मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक और मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति योजनाओं की समीक्षा के दौरान विद्यालय संदिग्ध संस्थानों की सूची में आया था। जांच के लिए गठित समिति ने जब दस्तावेजों की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।जांच में पता चला कि वर्ष 2021-22 और 2022-23 में 21 छात्रों के नाम पर 1 लाख 19 हजार 700 रुपये की छात्रवृत्ति स्वीकृत और वितरित की गई। हैरानी की बात यह रही कि स्कूल प्रबंधन ने लिखित रूप से बताया कि सूची में शामिल छात्र कभी संस्था में अध्ययनरत ही नहीं थे। इतना ही नहीं, पोर्टल पर दर्ज कुछ जिम्मेदार पदाधिकारी भी स्कूल में कभी कार्यरत नहीं रहे।अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन किसके खातों तक पहुंचा और इस पूरे खेल के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। मामले ने छात्रवृत्ति योजनाओं की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।