कम काम के दिनों से तनाव और थकान में आ सकती है कमी
सुबह की भागदौड़ में दफ्तर पहुंचना, लगातार 8 से 10 घंटे कुर्सी पर जमे रहकर कंप्यूटर स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रखना, बैक-टू-बैक मीटिंग्स और देर रात तक प्रोजेक्ट्स को पूरा करना—आज के कॉर्पोरेट जगत का स्थायी सच बन चुका है। करियर और नौकरी के लिहाज से इसे भले ही जरूरी मान लिया गया हो, लेकिन यह लाइफस्टाइल हमारी सेहत को चुपचाप ऐसे गंभीर खतरों की तरफ धकेल रही है, जिसकी कल्पना भी ज्यादातर कामकाजी युवाओं ने नहीं की होगी।
युवाओं को बीमार बना रही है लगातार बैठने की आदत
स्वास्थ्य विश्लेषकों और चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक दफ्तर में काम करने (लॉन्ग वर्किंग ऑवर्स) और शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहने की आदत शरीर को खोखला कर रही है। यही वजह है कि आज के युवाओं में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, अत्यधिक मानसिक तनाव, डायबिटीज और दिल के दौरे (हार्ट अटैक) जैसी बीमारियां महामारी की तरह फैल रही हैं।
अध्ययनों के अनुसार, जो लोग रोजाना 8 से 10 घंटे डेस्क जॉब करते हैं, उनमें वजन बढ़ने और मोटापे का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। स्क्रीन टाइम बढ़ने और फिजिकल एक्टिविटी शून्य होने के कारण शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता बेहद घट जाती है। इसी जानलेवा चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञ अब पारंपरिक 5 दिवसीय कार्य सप्ताह की जगह '4-डे वर्किंग वीक' (हफ्ते में चार दिन काम) की पुरजोर वकालत कर रहे हैं।
शोध का दावा: काम के घंटे घटने से कम होगा मोटापा
इस्तांबुल में आयोजित 'यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी' में पेश की गई एक हालिया रिपोर्ट में इस विषय पर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस शोध में वर्ष 1990 से 2022 के बीच दुनिया के 33 देशों के वर्किंग कल्चर और वहाँ के नागरिकों में मोटापे की दर का तुलनात्मक अध्ययन किया गया।
पाया गया कि अमेरिका, मेक्सिको और कोलंबिया जैसे देशों में, जहाँ काम के घंटे बहुत ज्यादा हैं, मोटापे की दर उन नॉर्डिक देशों (जैसे डेनमार्क, फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन) के मुकाबले कहीं अधिक है, जहाँ काम के दिन और घंटे कम हैं।
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ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर्स का गणित: क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, यदि सालाना काम के कुल घंटों में महज 1 प्रतिशत की भी कटौती कर दी जाए, तो देश में मोटापे की दर में 0.16 प्रतिशत की गिरावट लाई जा सकती है। इससे न केवल मोटापा थमेगा, बल्कि डिमेंशिया (भूलने की बीमारी), हृदय रोग और कुछ विशिष्ट प्रकार के कैंसर का खतरा भी टल जाएगा।
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यूके पर दबाव: ब्रिटेन मोटापे के मामले में वैश्विक सूची में नौवें स्थान पर है, जबकि वर्किंग ऑवर्स में वह 24वें पायदान पर है। वहाँ का एक औसत वयस्क सालभर में 1,505 घंटे काम करता है। विशेषज्ञ अब ब्रिटिश सरकार पर 4-डे वर्किंग व्हील लागू करने के लिए दबाव बना रहे हैं ताकि आबादी को अनियंत्रित वजन से बचाया जा सके।
ये देश पहले ही बदल चुके हैं अपना वर्किंग पैटर्न
हफ्ते में चार दिन काम करने की यह अवधारणा पूरी दुनिया के लिए नई नहीं है, कई देशों ने इसके महत्व को समझा है:
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE): यहाँ की संघीय सरकार और अधिकांश प्राइवेट सेक्टर 4.5 दिनों के कार्य सप्ताह पर चलते हैं, जहाँ शुक्रवार दोपहर के बाद काम बंद हो जाता है। इसके अलावा शारजाह प्रांत ने तो स्थानीय सरकारी कर्मियों के लिए अनिवार्य रूप से 4 दिन का वर्किंग वीक लागू कर दिया है।
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जापान: अपनी सख्त वर्क लाइफ के लिए जाने जाने वाले जापान में भी सरकार अब कंपनियों को अपनी मर्जी से 4 दिवसीय कार्य प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि कर्मचारियों का पारिवारिक और पेशेवर जीवन संतुलित रह सके।
हालांकि, इस व्यवस्था के आलोचकों का तर्क है कि 5 दिन के वेतन पर 4 दिन काम कराना कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि इससे उत्पादन और आय प्रभावित हो सकती है। भारत में अभी भी अधिकांश क्षेत्रों में 6 दिन और कॉर्पोरेट में 5 दिन काम की संस्कृति है।
विशेषज्ञ की राय: तनाव और कोर्टिसोल हार्मोन का खेल
चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कोराले-गेदारा के अनुसार, अत्यधिक काम सीधे तौर पर हमारे शरीर के विज्ञान को बिगाड़ता है। दफ्तर में ज्यादा समय बिताने और काम के दबाव से शरीर में 'कोर्टिसोल' (तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन) का स्तर अनियंत्रित रूप से बढ़ जाता है, जिसका सीधा संबंध तेजी से वजन बढ़ने और पेट की चर्बी जमा होने से है।
जब कर्मचारियों को तीन दिनों का वीकेंड (अवकाश) मिलेगा, तो उनका मानसिक तनाव कम होगा। वे अपनी सेहत के लिए वक्त निकाल पाएंगे, नियमित व्यायाम या जिम जा सकेंगे और घर पर बने पौष्टिक खान-पान पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। काम के घंटों में 20 प्रतिशत की यह कटौती कॉर्पोरेट जगत की उत्पादकता (Productivity) बढ़ाने के साथ-साथ चिकित्सा क्षेत्र पर बढ़ रहे मरीजों के बोझ को भी भारी मात्रा में कम कर सकती है।


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