मप्र सरकार ने एक बार फिर सहकारिता चुनाव कराने का मन बनाया
(गुरुशरण सिंह अहलूवालिया)
मप्र सरकार ने एक बार फिर सहकारिता चुनाव कराने का मन बनाया
2017 --18 से शिवराज सरकार ने नहीं कराये चुनाव।
मोहन सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में करेगी राज्य स्तर का किसान सम्मेलन.
सरकार और भाजपा ने अपने स्तर पर शुरू कर दी है चुनाव की तैयारी
खबर का असर
मध्य प्रदेश के सर्वहारा वर्ग के लिए संकल्प के साथ जो कहा वह किया करने वाले मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने वर्ष 2027 किस वर्ष बनाने का निर्णय किया था इसी के तहत 2017 के बाद सहकारी तथा मंडी चुनाव न होने की स्थिति को दैनिक सिटी टुडे समाचार पत्र द्वारा 5 फरवरी 2026 को प्रकाशित समाचार शिवराज सरकार का फैसला अफसरसाही के कारण किसानो की दुर्दशा नहीं हुए मंडियों तथा सहकारी समितियों के चुनाव के बाद 8 फरवरी को भाजपा राष्ट्रीय किसान मोर्चा के अध्यक्ष सांसद राजकुमार चहर से जब सिटी टुडे द्वारा मध्य प्रदेश में सहकारी समितियां तथा मंडीयो के चुनाव बावत प्रश्न के माध्यम से ध्यान आकर्षण कराया गया था तब श्री चार ने कहा था कि इस संबंध में राष्ट्रीय स्तर व तथा मुख्यमंत्री से चर्चा करूंगा।
मप्र में 50 लाख से अधिक किसानों की सदस्यता वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव लंबे अंतराल के बाद अब होने की संभावना है। प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव आखिरी बार 2013 में हुए थे, जिनका कार्यकाल 2018 में समाप्त हुआ। नियमानुसार छह माह पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन विधानसभा चुनाव, किसान कर्ज माफी और अन्य कारणों से यह लगातार टलता रहा। कांग्रेस और शिवराज सरकारों के कार्यकाल में भी यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इस बीच, वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर प्रशासकों की नियुक्ति की गई, लेकिन सहकारी अधिनियम के अनुसार यह व्यवस्था अधिकतम एक साल तक ही वैध थी। प्रदेश में यदि सबकुछ ठीक रहा तो सहकारिता के क्षेत्र में आने वाली साख समितियों और सहकारी बैंकों के चुनाव इस साल के अंत में कराए जा सकते है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए सरकार ने अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है, तो भाजपा संगठन भी इन चुनावों को लेकर अपनी स्थिति का आंकलन करने में जुट गई है। जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री किसानों को कृषि कल्याण वर्ष के दौरान सहकारिता के चुनाव कराकर किसानों को पदों पर बैठाने का तोहफा दे सकते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा पिछली बार जब विभागीय समीक्षा की गई थी, तब कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों को ये चुनाव कराने की तैयारी करने के निर्देश दिए थे। इन दोनों विभागों के मंत्रियों से भी कहा था कि वे अपने विभागों की योजनाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचे और उन्हें तमाम योजनाओं का लाभ देकर उनकी नब्ज की टटोलें।
(गुरुशरण सिंह अहलूवालिया)
किसी न किसी कारण टलता रहा चुनाव
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2013 को राज्य की 4,523 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति और 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के चुनाव कराए गए थे। जिनका कार्यकाल वर्ष 2018 में पूरा हो गया था, यानी कि इसी वर्ष सहकारिता के चुनाव कराए जाने थे, किंतु विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव के कारण मध्यप्रदेश में ये चुनाव टाल दिए
मोहन सरकार की किसानों के बीच पकड़ मजबूत करने की पहल
सूत्रों का कहना है कि अब सरकार चाहती है कि मध्यप्रदेश में सहकारी चुनाव कराकर अपनी किसानों के मध्य अपनी पकड़ को और मजबूत किया जा सके। हालांकि गैरदलीय चुनाव होने की वजह से राजनैतिक दलों का सीधा हस्तक्षेप नहीं रहता है, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह चुनाव काफी अहम माने जाते है, ऐसे में राजनैतिक दल इन चुनावों में अपने-अपने समर्थकों के जरिए अपना जनाधार का मूल्यांकन भी करते है। इसी तरह सरकार कृषि मंडियों के चुनाव भी इसी साल करा सकती है। यह चुनाव भी वर्ष 2017 में कराए जाने थे, लेकिन तभी से चुनाव टलते आ रहे है और राज्य की कृषि उपज मंडियां प्रशासकों के हवाले हैं। गौर करने वाली बात यह भी है कि नियमतया कृषि उपज मंडियों में अधिकतम दो साल तक के लिए ही प्रशासकों को बैठाया जा सकता है। लेकिन अब यह समय सीमा काफी आगे निकल चुकी है। जल उपभोक्ता संस्था समितियों के चुनाव की भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। इनके भी चुनाव वर्ष 2018 से नहीं कराए गए है। हालांकि सरकार ने नियमों में संशोधन कर जल उपभोक्ता संस्था समितियों का कार्यकाल 2 से बढ़ाकर 5 साल कर दिया था।
पंचायती राज चुनाव अप्रैल 2027 में प्रस्तावित
जानकारों की मानें तो सरकार चाहती है कि प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनाव से पहले सहकारिता और कृषि उपज मंडी और जल उपभोक्ता संस्था समितियों के चुनाव करा दिए जाएं। पंचायती राज चुनाव अप्रैल 2027 में प्रस्तावित है। ऐसे में सरकार इन चुनावों को इसी साल दिसम्बर माह से पहले तक कराना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि तो सरकार कृषि कल्याण वर्ष के दौरान भोपाल या राज्य के किसी दूसरे स्थान पर किसानों से जुड़ा एक बड़ा सम्मेलन कर सकती है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी होगी। इसी कार्यक्रम में सरकार सहकारिता और कृषि उपज मंडी सहित किसानों से जुड़े दूसरे चुनाव कराने की घोषणा कर सकती है।


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