आगर मालवा।  आगर मालवा जिले में स्थित बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर देश का एक अनोखा और ऐतिहासिक शिव मंदिर है, जिसका जीर्णोद्धार ब्रिटिश काल में एक अंग्रेज अधिकारी द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर भारत का एकमात्र ऐसा शिव मंदिर माना जाता है, जिसके पुनर्निर्माण या जीर्णोद्धार में एक ब्रिटिश व्यक्ति की सीधी भूमिका रही।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और चमत्कारी कहानी

मंदिर का मूल निर्माण 1528 से 1536 के बीच हुआ था और यह बाणगंगा नदी के किनारे स्थित है। 19वीं शताब्दी में यह जीर्ण-शीर्ण हो चुका था। वर्ष 1879 में द्वितीय एंग्लो-अफगान युद्ध के दौरान आगर मालवा की ब्रिटिश छावनी के लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन को अफगानिस्तान में युद्ध का नेतृत्व सौंपा गया। लंबे समय तक पत्नी को कोई संदेश न मिलने पर लेडी मार्टिन अत्यंत व्यथित थीं।
एक दिन घुड़सवारी के दौरान वे इस मंदिर के पास से गुजरीं। मंदिर की जीर्ण-शीर्ण दीवार देखकर उन्होंने पुजारियों से पूछा, तो पता चला कि बाबा बैजनाथ हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। उन्होंने भगवान शिव की आराधना शुरू की और पति की सुरक्षित वापसी की प्रार्थना की। कहानी के अनुसार, युद्ध में कर्नल मार्टिन पठान सेना से घिर गए थे, लेकिन एक त्रिशूल धारी, बाघंबर पहने, जटाधारी योगी (जिन्हें भगवान शिव का रूप माना गया) ने उनकी रक्षा की और वे सुरक्षित लौट आए। घर पहुंचकर पत्नी ने सारी बात बताई। कृतज्ञता से अभिभूत होकर दंपति ने सन् 1883 में 15 हजार रुपये का चंदा कर मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार करवाया। मंदिर में आज भी यह शिलालेख मौजूद है, जो इस घटना का साक्षी है।

 कर्नल मार्टिन की छठी पीढ़ी की वंशज आ रही हैं

इस ऐतिहासिक मंदिर की महत्ता को और बढ़ाते हुए एक नई खुशखबरी सामने आई है। यातायात थाना प्रभारी सूबेदार जगदीश यादव के अनुसार, कर्नल मार्टिन की छठी पीढ़ी की वंशज शांति मैकलवर (Shanti McIver या McLiver) मैडम ऑस्ट्रेलिया से 14 फरवरी को आगर मालवा पहुंची। वे इस बार महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा बैजनाथ के दर्शन करेंगी और विशेष रूप से शिवरात्रि उत्सव में शामिल होंगी। यह घटना मंदिर के इतिहास को जीवंत करती है और दिखाती है कि भगवान शिव की भक्ति सीमाओं और काल से परे है। ब्रिटिश काल की इस अनोखी श्रद्धा की कहानी आज भी लाखों भक्तों को प्रेरित करती है।